Home अन्तर्राष्ट्रीय भारत में हर दसवें लड़के को नहीं मिल रही है दुल्हन

भारत में हर दसवें लड़के को नहीं मिल रही है दुल्हन

नई दिल्ली। भारत में औसतन हर दसवें लड़के के लिए दुल्हन नहीं है और इस वजह से उनकी शादी में मुश्किलें आ रही हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना रिपोर्ट बताती है कि भारत में पुरुष और महिलाओं के बीच खाई बढ़ती जा रही है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से खेड़ा हटाना गांव में रहने वाले अनुज शर्मा पिछले 10 साल से परेशान हैं। वजह है उनकी शादी। डीडब्ल्यू से बातचीत में उन्होंने बताया, जब मैं 25 साल का था, तब से मेरे घरवाले मेरे लिए दुल्हन खोज रहे हैं। लेकिन आस-पास के गांव में लड़कियों की इतनी कमी है कि आज 10 साल हो गए हैं और खोज आज भी बरकरार है। वो बताते हैं इस पूरे गांव में आपको हर परिवार में मेरे जैसे ही कई कुंवारे लड़के मिल जाएंगे। जो कई कई साल से दुल्हन की खोज में हैं। अनुज के मुताबिक उनके गांव में कम से कम 30 लड़के कुंवारे हैं और दुल्हन की तलाश में हैं। वो खुद ये बात कबूलते हैं कि आस-पास के इलाकों को जोड़ दें तो यहां 100 लड़कों पर 70 लड़कियां ही मिलेंगी। लिंगानुपात में असमानता कपिल शर्मा और उनके गांव के तमाम लड़कों के कुंवारे होने की सबसे बड़ी वजह है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मानें तो शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीतिक नेतृत्व के मामले में महिलाओं को पुरुषों के बराबर पहुंचने में 257 साल लगेंगे। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट बताती है कि 153 देशों में राजनीतिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य और समान वेतन के क्षेत्र में महिलाओं की क्या स्थिति है। इसी के आधार पर इन देशों की रैंकिंग तैयार की जाती है। इस फोरम की हाल की रिपोर्ट बताती है कि भारत स्वास्थ्य, शिक्षा और समान वेतन के मामले में पहले से कहीं ज्यादा पिछड़ गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं को आर्थिक, राजनीतिक अधिकार और शिक्षा के हिसाब से पुरुषों के बराबर पहुंचने में 257 साल लगेंगे। पिछले साल ये आंकड़ा 202 साल का था। यह रिपोर्ट 153 देशों पर रिसर्च करके तैयार की गई है।
महिलाओं का स्वास्थ्य में स्थान
महिलाओं के स्वास्थ्य के मामले में भारत का सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। 153 देशों की सूची में भारत 150वें स्थान पर है। भारत लिंगानुपात में 149वें स्थान पर है, पिछले साल देश की स्थिति बेहतर थी। भारत पिछले साल 108वें नंबर पर था।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान के बाद भी भारत में हर 100 लड़के पर महज 91 लड़कियां हैं। जो पाकिस्तान जैसे देशों के मुकाबले भी खराब स्थिति है। पाकिस्तान में यह अनुपात 100 और 92 का है। यहां तक कि नेपाल और बांग्लादेश जैसे देश भी भारत से ऊपर हैं। नेपाल 101 और बांग्लादेश 50वें स्थान पर है। यमन और इराक का प्रदर्शन सबसे ज्यादा खराब रहा है। मनोवैज्ञानिक भारत की कई समस्याओं में इस घटते लिंगानुपात को भी वजह मानते हैं। मनोवैज्ञानिक शुचि गोयल के अनुसार भारत में बढ़ते रेप का सबसे प्रमुख कारण भी लिंगानुपात का घटना है। इकोनॉमिक फोरम ने अपनी रिपोर्ट में कहा, लिंगानुपात को कम करने में जहां पिछले साल 2018 की रिपोर्ट में 108 साल का वक्त बताया गया था, इस साल वो घटकर 99.5 साल तो हो गया है लेकिन महिलाओं के साथ वेतन, राजनीति, शिक्षा, और स्वास्थ्य में होने वाले भेदभाव को खत्म होने में एक व्यक्ति के जीवनकाल का वक्त लग जाएगा।

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