Home खेतीबाड़ी श्रीगंगानगर : गैर बीटी नरमा की दो नई किस्में आर.एस. 2818 व आर. एस. 2827 विकसित, 31 क्विंटल प्रति हैक्टेयर का उत्पादन

श्रीगंगानगर : गैर बीटी नरमा की दो नई किस्में आर.एस. 2818 व आर. एस. 2827 विकसित, 31 क्विंटल प्रति हैक्टेयर का उत्पादन

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श्रीगंगानगर/किसान हित। कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर के वरिष्ठ प्रजनक डॉ. विजय प्रकाश के वैज्ञानिक कौशल में दो और उपलब्धियाँ जुड़ गई है। डॉ. विजय प्रकाश जो वरिष्ठ कपास प्रजनक का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे है। उनके नेतृत्व में कृषि अनुसंधान केन्द्र की कपास परियोजना द्वारा गैर बीटी नरमा की दो नई किस्में आर.एस. 2818 व आर. एस. 2827 विकसित की गई है जो कि हाल ही में वर्चुअल प्लेटफार्म पर 18 मई को ही सम्पन्न कपास कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर पर भारत के उत्तरी राज्यों पंजाब, हरियाणा व राजस्थान राज्य के सिंचित भू-ंउचयभाग के लिये चिन्हित कर ली गई है। दोनों किस्में सघन पौध विन्यास  (67.5 गुणा 20 सेमी.) में अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है। दोनों ही किस्मों ने जोनल चैक किस्म सीएसएच 3075 के मुकाबले 16 से 17 प्रतिशत व स्थानीय किस्म आर.एस. 875 की अपेक्षा लगभग 25 प्रतिशत अधिक उपज दी है। इन किस्मों में कॉटन लीफ कर्ल वायरस भी अपेक्षाकृत कम लगता है। आर.एस. 2818 ने तीन वर्षों के परिणामों में लगभग 31 क्विंटल प्रति हैक्टेयर का उत्पादन दिया है। इसके रेशे की लम्बाई 27.36 मिलीमीटर व मजबूती 29.38 ग्राम/टेक्स पाई गई है। टिण्डे का औसत भार 3.2 ग्राम होता है। बिनोलों में 17.85 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है। औटाई भी 34.6 प्रतिशत आंकी गई है। नरमा किस्म आर.एस. 2827 ने 30.5 क्विंटल प्रति हैक्टेयर का औसत उत्पादन दिया है। इसके रेशे की लम्बाई 27.22 मिलीमीटर व मजबूती 28.86 ग्राम/टेक्स आंकी गई है। टिण्डे का औसत वजन 3.3 ग्राम होता है। बिनोलों में तेल की मात्रा लगभग 17.2 प्रतिशत तक होती है। इन किस्मों के विकास में कपास परियोजना के पौध व्याधि विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार, कीट वैज्ञानिक डॉ. रूप सिंह मीणा व वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. आर.पी.एस. चौहान का सहयोग रहा है। कृषि अनुसंधान केन्द के क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. उम्मेद सिंह शेखावत ने बताया कि नरमें की गैर बीटी किस्मों से किसानों को सस्ता बीज उपलब्ध होगा। यदि गैर बीटी किस्मों की समय से बुवाई की जाये व स्प्रे शेडयूल का ध्यान रखा जाये तो बीटी कॉटन के बराबर उपज प्राप्त की जा सकती है। पिछले वर्ष भी केन्द्र द्वारा नरमा की नई किस्म आर.एस. 2814 विकसित की गई थी, इस तरह वरिष्ठ प्रजनक डॉ. विजय प्रकाश ने दो वर्षों में ही अमेरिकन कपास किस्मों के विकास की हैट्रिक लगा दी है। स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रोफेसर रक्षपाल सिंह ने क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. उम्मेद सिंह शेखावत के कुशल नेतृत्व में कपास परियोजना टीम द्वारा सराहनीय कार्य करने के लिये बधाई देते हुये इसी तरह कृषक हित में निरंतर शोध कार्य करने के लिये प्ररित किया। कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. प्रकाश सिंह शेखावत ने भी मानव संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बावजूद कपास परियोजना के वैज्ञानिकों द्वारा किस्म विकसित करने की सराहना की व शुभकामनायें दी।

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